
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और Bangladesh Nationalist Party (BNP) की अध्यक्ष खालिदा जिया का निधन हो गया है। उन्होंने 80 साल की उम्र में आज सुबह करीब 6 बजे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में अंतिम सांस ली।
खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं और 23 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराई गई थीं। 11 दिसंबर से वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं।
कई बीमारियों से थीं पीड़ित
मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार, खालिदा जिया को Liver cirrhosis Kidney failure Lungs और heart related complications जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं थीं।
डॉक्टरों ने उन्हें विदेश ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन हालत नाजुक होने के कारण यह संभव नहीं हो सका।
जेल से रिहाई और आखिरी सफर
खालिदा जिया को भ्रष्टाचार के मामलों में सजा हुई थी और वे जेल में थीं। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद उन्हें रिहा किया गया।
इलाज के लिए वे जनवरी 2025 में लंदन गईं और स्वास्थ्य में सुधार के बाद मई 2025 में बांग्लादेश लौटीं, लेकिन नवंबर 2025 में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
बेटे तारिक रहमान की वापसी
खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान हाल ही में 17 साल के निर्वासन के बाद बांग्लादेश लौटे थे। उन्होंने BNP की कमान संभाली और पार्टी को फिर से सक्रिय किया।
बताया जा रहा है कि खालिदा जिया ने निधन से ठीक पहले आम चुनाव के लिए नामांकन भी भरा था।
कौन थीं खालिदा जिया?
- बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री
- 3 बार प्रधानमंत्री रहीं
- 1991–1996
- 1996 (कुछ हफ्तों के लिए)
- 2001–2006
मुस्लिम दुनिया में बेनजीर भुट्टो के बाद दूसरी महिला PM उनके पति जियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे, जिनकी 1981 में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद ही खालिदा जिया राजनीति में सक्रिय हुईं।
तीन देशों की नागरिक रहीं
खालिदा जिया का जन्म जलपाईगुड़ी (वर्तमान भारत) में हुआ था। बंटवारे और इतिहास की करवटों के चलते वे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश — तीन देशों की नागरिक रहीं।
सत्ता गई, सियासत नहीं
विडंबना यह रही कि कभी सत्ता में रहीं कभी जेल में कभी वेंटिलेटर पर लेकिन खालिदा जिया की सियासत कभी ICU में नहीं गई। उनका जीवन बताता है कि South Asian politics में सत्ता temporary होती है, संघर्ष permanent।
खालिदा जिया का निधन सिर्फ एक नेता की मौत नहीं, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति के एक पूरे युग का अंत है। अब सवाल यह है—
BNP उनकी विरासत को कैसे आगे बढ़ाएगी और क्या बांग्लादेश की राजनीति में नया संतुलन बनेगा?
दो महिलाएं, दो विरासतें
बांग्लादेश की राजनीति पिछले तीन दशकों तक दो नामों के इर्द-गिर्द घूमती रही—
खालिदा जिया (BNP)
शेख हसीना (Awami League)
यह rivalry सिर्फ सत्ता की नहीं, बल्कि इतिहास, विचारधारा और व्यक्तिगत त्रासदी से जुड़ी रही।

जड़ों में है टकराव
खालिदा जिया के पति जियाउर रहमान— बांग्लादेश के राष्ट्रपति, 1981 में हत्या। शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान— राष्ट्रपिता, 1975 में हत्या। दोनों परिवारों की राजनीतिक पहचान हत्या, सत्ता और सैन्य-नागरिक संघर्ष से बनी।
Ideology का फर्क
| Khaleda Zia | Sheikh Hasina |
|---|---|
| BNP | Awami League |
| Nationalist + Conservative | Secular + Pro-Liberation |
| Military-backed era roots | Liberation movement legacy |
| China, Pakistan tilt | India-friendly stance |
जेल, केस और बदले की राजनीति
- खालिदा जिया पर corruption cases, जेल
- BNP का आरोप: Political vendetta
- शेख हसीना सरकार का दावा: Rule of लॉ । आलोचकों का कहना है Bangladesh में opposition को कमजोर करने का सबसे बड़ा हथियार—कानून।
“एक देश, दो रानियां… और लोकतंत्र बीच में पिसता रहा।”
संघर्ष से सत्ता तक, और सत्ता से जेल तक
1945–1978 | शुरुआती जीवन
- जन्म: जलपाईगुड़ी (अब भारत)
- शादी: जियाउर रहमान
- राजनीति से दूरी
1981 | Turning Point
- राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या
- खालिदा जिया की राजनीति में एंट्री
1984 | BNP की अध्यक्ष बनीं
- सैन्य शासन के खिलाफ आंदोलन
- लोकतंत्र की वापसी की मांग
1991 | पहली बार PM
- BNP की ऐतिहासिक जीत
- Bangladesh की पहली महिला PM
1996 | छोटा कार्यकाल
- विवादित चुनाव
- सत्ता कुछ हफ्तों की
2001–2006 | दूसरा बड़ा कार्यकाल
- मजबूत सरकार
- लेकिन corruption और extremism के आरोप
2010–2018 | केस और जेल
- भ्रष्टाचार मामलों में सजा
- राजनीतिक हाशिये पर
2024–2025 | बीमारी और रिहाई
- जेल से रिहाई
- लंदन में इलाज
- BNP की symbolic leader बनी रहीं
2025 | निधन
- ढाका में अंतिम सांस
- एक युग का अंत
Global Capitals तक शोक संदेश
भारत
भारत के नेताओं ने खालिदा जिया के निधन पर लोकतांत्रिक संघर्ष और महिला नेतृत्व को याद किया। हालांकि भारत-BNP रिश्ते हमेशा सहज नहीं रहे।
पाकिस्तान
पाकिस्तान ने उन्हें “South Asian Muslim world की प्रभावशाली नेता” बताकर श्रद्धांजलि दी।
ब्रिटेन
लंदन में लंबे इलाज के चलते UK के political circles Bangladeshi diaspora ने उन्हें symbolic opposition voice बताया।
अमेरिका
US State Department ने बयान में कहा: “Her passing marks the end of a defining chapter in Bangladesh’s political history.”
Human Rights Groups
Opposition suppression पर सवाल जेल में इलाज को लेकर पुरानी चिंताएं फिर उठीं।
“विदेशों ने legacy देखी, देश ने सिर्फ loyalty।”
खालिदा जिया और शेख हसीना की rivalry ने बांग्लादेश को stable government भी दिया और polarised democracy भी
अब सवाल यह नहीं कि rivalry खत्म हुई, सवाल यह है कि क्या बांग्लादेश अब ‘दो महिलाओं की राजनीति’ से आगे बढ़ पाएगा?
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